जमीनी स्तर पर किये गये सामूहिक प्रयासों को आगे लाने का मंच है ‘मन की बात’ : प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि मन की बात कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार के कामों को हाईलाइट करना नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर किये गये सामूहिक प्रयासों को सामने लाना है।वर्ष 2021 के अंतिम मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका हमेशा से मानना रहा है कि चमक-दमक से दूर बहुत से लोग अच्छा काम कर रहे हैं। वह देश के लिए अपना आज खपा रहे हैं, ऐसे लोगों की बात उन्हें प्रेरित करती है। वह चाहते हैं कि उनके प्रयासों से ‘मन की बात’ सुसज्जित हो।

इसी क्रम में ‘मन की बात’ के 84वें संस्करण में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जनशक्ति का प्रयास ही है जिससे आज 100 सालों में आई सबसे बड़ी महामारी से देश लड़ सका है। हम एक परिवार के रूप में एक साथ खड़े हैं, अपने शहर, अपने मोहल्ले, अपनी गलियों में हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी। देश में वैक्सीनेशन कार्यक्रम के तहत 140 करोड़ खुराक दिए जाने को एक बड़ी उपलब्धि करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विज्ञान, भारत के वैज्ञानिकों और भारत की व्यवस्था पर प्रत्येक भारतीय के भरोसे को दर्शाता है और अपने दायित्व ठीक से निभाने की इच्छाशक्ति का भी प्रमाण है।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में तुर्की के बच्चों के गाये ‘वंदे मातरम्’ की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि तुर्की के बच्चों ने यह जो गाना गाया है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे ही प्रयास, दो देशों के लोगों को और करीब लाते हैं। तमिलनाडु में हादसे के शिकार हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर को उड़ा रहे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह की उनके स्कूल के प्रिंसिपल को लिखी गई चिट्ठी का प्रधानमंत्री ने जिक्र किया। इसके माध्यम से उन्होंने बताया कि सफलता के शीर्ष पर पहुंच कर भी जड़ों से जुड़े रहना कितना जरूरी है। जब वरुण सिंह के पास शौर्य चक्र हासिल करने के बाद उत्सव मनाने का अवसर था तब उन्होंने अपनी आने वाली पीढ़ियों की चिंता की। वह चाहते थे कि विद्यार्थियों का जीवन भी एक उत्सव बने।

पुस्तकों के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वह वर्ष में पढ़ी अपनी पुस्तकों की जानकारी लोगों से साझा करें ताकि अन्य लोग भी अगले वर्ष की अपनी सूची में उन्हें शामिल कर सकें। उन्होंने कहा कि किताबें न सिर्फ ज्ञान देती हैं बल्कि व्यक्तित्व को भी सवार दी हैं। किताबें पढ़ने का शोक एक अद्भुत संतोष देता है। पुस्तकें पढ़ने और अन्य को पढ़ाने के लिए प्रेरित करने का बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज जब हमारा स्क्रीन टाइम यानी कंप्यूटर, मोबाइल और लैपटॉप इत्यादि में अधिक व्यतीत हो रहा है पुस्तक पढ़ना पॉपुलर बने इसके लिए सबको मिलकर प्रयास करना चाहिए।

पुस्तक पढ़ने पढ़ाने की दिशा में किए गए तेलंगाना के डॉक्टर कुरेला विट्ठलाचार्य का उदाहरण है। इन्होंने अपनी बढ़ती उम्र में अपने प्रयासों से या यादाद्री भुवनागिरी जिले के रमन्नापेट मंडल में दो लाख पुस्तकों वाली लाइब्रेरी तैयार की है। उन्होंने बताया कि वह चाहते हैं कि पढ़ने के दौरान उन्होंने जिस मुश्किलों का सामना किया, वह अन्य न करें। उनके प्रयासों से अन्य लोग भी अपने गांव में पुस्तकालय निर्माण में जुटे हैं।

‘मन की बात’ कार्यक्रम से प्रधानमंत्री ने स्कूली छात्रों के साथ होने वाली ‘परीक्षा पे चर्चा’ के आयोजन की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 28 दिसंबर से इसके लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होगा। साथ ही नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के छात्र, अध्यापक और अभिभावकों के लिए ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा भी आयोजित की जाएगी। उन्होंने सभी से इसमें शामिल होने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने आजादी का ‘अमृत महोत्सव’ को मनाने के नवाचारी तरीकों में से एक का उदाहरण अपनी बातचीत में रखा। उन्होंने बताया कि लखनऊ के नीलेश एक अनूठे ड्रोन शो का आयोजन किया है। इसी तरह के प्रयास अन्य शहरों और गांवों में भी होने चाहिए ताकि आजादी के आंदोलन से जुड़े अनूठे पहलू लोगों के सामने आए। उन्होंने स्वतंत्र संग्राम की महान विभूतियों से प्रेरित होकर देश को मजबूत करने के प्रयास के लिए आगे आने का भी आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान भारतीय संस्कृति के दुनिया भर में हो रहे प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में भारतीय संस्कृति के बारे में जानने को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है अलग-अलग देशों में ना सिर्फ हमारी संस्कृति के बारे में जानने के लिए लोग उत्सुक हैं बल्कि उसे बढ़ाने में भी मदद कर रहे हैं विराम। एक अन्य प्रयास का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने सागर मुले का जिक्र किया जिन्होंने गोवा की अद्भुत चित्रकला को संरक्षित करने का प्रयास किया है। इस उदाहरण से उन्होंने कहा कि छोटी सी कोशिश एक छोटा सा कदम हमारी समृद्ध कलाओं के संरक्षण में बहुत बड़ा योगदान दे सकता है।

पक्षियों को बचाने की दिशा में अरुणाचल प्रदेश में हुए एक अनूठे प्रयास का प्रधानमंत्री ने विशेष उल्लेख किया। मोदी ने बताया कि वहां के लोग पक्षियों को शिकार से बचाने के लिए एयर गन सरेंडर अभियान चला रहे हैं। अब तक 16 सौ से ज्यादा एयर गन सरेंडर हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि अरुणाचल में पक्षियों की 500 से अधिक प्रजातियों का घर है और इनमें से दुनिया में कुछ ऐसी है जो कहीं नहीं पाई जाती। पक्षियों के जीवन चक्र में महत्व को समझाते हुए प्रधानमंत्री ने सह अस्तित्व के भारतीय जीवन दर्शन को पहचानने के प्रयासों का महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में स्वच्छता का भी जिक्र आया। जिसमें प्रधानमंत्री ने पुनीत सागर के 30 हजार एनसीसी कैडेट के साथ मिलकर समुद्री तट की सफाई के प्रयासों। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम जिन स्थानों पर जाते हैं उन्हें दूषित न करें। उन्होंने कहा कि स्वच्छता का संकल्प अनुशासन, सजगता और समर्पण से ही पूरा होगा। उन्होंने साफ वाटर नाम की स्टार्ट का भी उल्लेख किया जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए लोगों को उनके इलाके में पानी की शुद्धता और गुणवत्ता से जुड़ती जानकारी दे रहा है। इसके महत्व को देखते ग्लोबल पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।

स्वच्छता की दिशा में सरकारी मंत्रालयों के प्रयासों और उनके नतीजों से प्राप्त लाभों का प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया और कहा कि पुरानी फाइलें और कार्यों के हटाए जाने से आज वहां जगह का समुचित उपयोग हो पा रहा है। प्रधानमंत्री ने अंत में देशवासियों को नये साल की शुभकामनाएं देते हुए देश और समाज के विकास को ध्यान में रखकर नये संकल्प लेने और उन्हें पूरा करने के लिये प्रयासरत होने का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि 2022 नये भारत के निर्माण में एक स्वर्णिम अध्याय होगा। उन्होंने कहा कि हमारे सपने तभी पूरे होंगे जब समाज और देश का विकास होगा हमारी प्रगति से देश की प्रगति के रास्ते खुलेंगे इसके लिए हमें आज ही लगना होगा बिना क्षण गंवाये प्रयास करना होगा।

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