परमवीर अलबर्ट एक्का की पुण्यतिथि तीन दिसंबर को

गुमला । लांस नायक परमवीर अलबर्ट एक्का की 50 वीं पुण्य तिथि शुक्रवार को मनाई जाएंगी। वे भारतीय सेना में थे और तीन दिसंबर 1971 को भारत-पाकिस्तान युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उनका जन्म 27 दिसंबर 1942 को गुमला जिले के डुमरी ब्लॉक के जारी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम जूलियस एक्का और मां का नाम मरियम एक्का था।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा सीसी स्कूल पतराटोली में और माध्यमिक शिक्षा भिखमपुर मीडिल स्कूल से हुई। वे भारतीय सेना में 1961 में शामिल हुए थे और बिहार रेजीमेंट में अपना सेवा दी। उसी समय 14 गार्ड का गठन किया गया था। वे एक अच्छे हॉकी खिलाड़ी भी थे। उनका विवाह बलमदीना एक्का से हुई थी। बलमदीना एक्का का भी निधन इसी वर्ष 16 अप्रैल 2021 को चैनपुर स्थित उनके आवास में हो गया। उनके पार्थिव शरीर को परमवीर अलबर्ट एक्का के पैतृक गांव जारी में ही सम्मान के साथ परमवीर अल्बर्ट एक्का की समाधि के बगल में दफनाया गया।

परमवीर को लगी थी 20 से अधिक गोलियां
युद्ध के दौरान परमवीर अलबर्ट एक्का को 20 से अधिक गोलियां लगी थी और उनका शरीर छलनी हो गया था। वे टॉप टॉवर से नीचे गिर गए थे। घटना 1971 की थी। जब पाकिस्तान के साथ जंग के समय गंगासागर के पास मोर्चे पर अलबर्ट एक्का तैनात थे। वहां के रेलवे स्टेशन के पास 165 पाकिस्तानी सैनिक घुसपैठ कर लिए थे। अलबर्ट एक्का और उनके बटालियन के साथियों ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए 65 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया । लेकिन टॉप टॉवर के उपर खड़ी दुश्मन की सेना अचानक मशीनगन से गोलियां बरसाने लगी। इस पर अलबर्ट एक्का दौड़ते हुए टॉप टॉवर के उपर चढ़ गए और मशीनगन को अपने कब्जे में लेकर बंकर को तहस नहस कर दिया। परंतु तब तक करीब 20 गोलियां उनके सीने में लग चुकी थी । मरणोपरांत उन्हें सर्वौच्च सैनिक सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया।

परमवीर अलबर्ट एक्का की आदमकद प्रतिमा क्षतिग्रस्त, प्रशासन बेखबर
बिहार -झारखंड के इकलौते परमवीर चक्र से सम्मानित अलबर्ट एक्का की पुण्यतिथि हर वर्ष तीन दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन जारी गांव के स्कूली बच्चों के द्वारा फुटबॉल, हॉकी, दौड़ आदि प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है। मगर अफसोस की बात है कि परमवीर के पैतृक गांव जारी में लगी हुई परमवीर अलबर्ट एक्का की आदमकद प्रतिमा क्षत- विक्षत स्थिति में है। इस क्षतिग्रस्त प्रतिमा पर ना तो जनप्रतिनिधियों या प्रखंड या जिला प्रशासन की कोई नजर है।

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