आंकड़ों ने दिखाई पिछले सात साल में बदलते कश्मीर की नई तस्वीर

– तीस साल के भीतर कश्मीर में 14,155 आम लोग आतंकी गतिविधियों में मारे गए
– केंद्र में भाजपा शासन के सात साल में 239 आम नागरिक आतंवादियों के शिकार बने

नई दिल्ली, 06 दिसंबर (हि.स.)। तीस साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले सात साल में बदलते कश्मीर की नई तस्वीर नजर आएगी। लगभग सत्तर साल से आतंक का सबसे अधिक दंश कश्मीर ने ही झेला है लेकिन अब समय के साथ कश्मीर की तस्वीर बदल रही है। वर्ष 1990 से लेकर सितंबर, 2021 तक कश्मीर में 14,155 आम नागरिक आतंकी गतिविधियों में मारे गए हैं। सिर्फ पिछले 11 साल में तीन सौ आम नागरिक आतंवादियों के शिकार बने। केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद कश्मीर में सिर्फ 239 आम लोगों की हत्या हुई है। यानी कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में मरने वाले नागरिकों की संख्या अब काफी कम हो गई है।

दरअसल, नोएडा के आरटीआई एक्टविस्ट रंजन तोमर ने केन्द्र सरकार से वर्ष 1990 से अब तक कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में मारे गए आम लोगों के बारे में आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। इसके जवाब में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें 2 नवंबर 2021 को सूचना उपलब्ध कराई। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 1990 से सितंबर 2021 तक कश्मीर में 14,155 आम नागरिक आतंकवादियों के हमलों में मारे गए थे। नब्बे के दशक में कश्मीर में 8,996 लोग आतंकवादी घटनाओं में मारे गए थे।

उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर नजर डालें तो 1990 में 461, 1991 में 382, 1992 में 634, 1993 में 747, 1994 में 820 लोगों को आतंकवादियों ने निशाना बनाया था। वर्ष 1995 में यह संख्या बढ़कर 1031, 1996 में 1341, 1997 में 971, 1998 में 889 और 2000 में 847 लोग आतंकी घटनाओं में मारे गए थे। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 से लेकर 2010 तक कश्मीर में आतंकी घटनाओं में 4819 लोग मारे गए। इस दशक में 2008 के बाद कश्मीर में आम लोगों के मारे जाने की घटनाओं में कमी आना शुरू हो गया।

वर्षवार देखें तो 2001 में 996, 2002 में 1008, 2003 में 795, 2004 में 707, 2005 में 557, 2006 में 389 एवं 2007 में 158, 2008 में 91 2009 में 71, 2010 में 47 लोग आतंकी घटनाओं में मारे गए। इसके बाद 2011 में 31, 2012 में 15, 2013 में 15, 2014 में 28, 2015 में 17, 2016 में 15, 2017 में 40, 2018 में 39, 2019 में 39, 2020 में 37 और 2021 में सितंबर माह तक 24 आम नागरिकों की हत्या हुई है।

गृह मंत्रालयों के इन आंकड़ों से एक बात स्पष्ट हुई है कि पिछले 30 साल में कश्मीर में सबसे अधिक लोगों की हत्याएं 1990 के दशक में हुईं। केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद कश्मीर में वर्ष 2014 से लेकर सितंबर 2021 तक केवल 239 लोग आतंकी घटनाओं में मारे गए हैं। दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बनी केन्द्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को एक बड़ा कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 तथा अनुच्छेद 35-ए के प्रावधानों को निरस्त कर दिया।

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