विधानसभा में चौथे दिन भी गरमाया जेपीएससी का मुद्दा

रांची। झारखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र के चौथे दिन मंगलवार को भी जेपीएससी मुद्दे को लेकर भाजपा विधायकों का हंगामा जारी रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जेपीएससी को लेकर भाजपा विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। भाजपा विधायक वेल में घुसकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान अलग-अलग नारे भी लगा रहे थे। कभी रिपोर्टिंग टेबल पीटकर, कभी वेल में ही बैठकर तो कभी एक साथ मिलकर जोरों की आवाज निकालकर भाजपा विधायक हंगामा करते रहे।

इस दौरान सरकार होश में आओ, जेपीएससी रद्द करो, जेपीएससी की दलाली नहीं चलेगी, अमिताभ चौधरी को बर्खास्त करो, सीबीआई से जांच कराना होगा और छात्र विरोधी सरकार होश में आओ जैसे नारे सदन में गूंज रहे थे। मुख्यमंत्री ने सोमवार को सदन में कहा था कि जेपीएससी में आदिवासी, पिछड़े और दलित बच्चे आये हैं। ऐसे में मनुवादी लोग हंगामा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान का विरोध भाजपा विधायक कर रहे थे।

दूसरी ओर भाजपा विधायक मनीष जायसवाल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के समय यह कहते हुए कि इस सरकार में नहीं सुनी जाती और उन्होंने प्रोसीडिंग्स का पेपर सदन में फाड़ दिया। इसपर विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि सदन में प्रोसिडिंग पेपर को फाड़ना विधानसभा की अवमानना है। इसपर करवाई होनी चाहिए। इसके बाद मनीष जायसवाल के इस कृत्य से नाराज स्पीकर ने कहा कि निश्चित होगी करवाई। उन्होंने कहा कि सवाल भी लाते है, वेल में भी आते है, प्रोसिडिंग भी फाड़ते हैं यह किस तरह का आचरण है। इस तरह के आचरण को किसी भी कीमत पर बरदाश्त नहीं किया जाएगा। आपलोग लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त करने चाहते हैं। यह आचरण क्षम्य नहीं है।

मनीष जायसवाल के पेपर फाड़ने से गुस्से में सत्ता पक्ष के विधायक भी वेल में आकर हंगामा करने लगे। वह मनीष जायसवाल पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। इसके बाद स्पीकर ने सदन की कार्रवाई को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इसके पूर्व शीतकालीन सत्र के चौथे दिन पहली पाली में हंगामे के बीच अल्पसूचित प्रश्न काल के दौरान सीपी सिंह सदन में मौजूद नहीं थे। जब स्पीकर रविन्द्र नाथ महतो ने सीपी सिंह को सरकार से सवाल पूछने के लिये नाम पुकारा तो वह सदन से अनुपस्थित थे।

इस पर स्पीकर ने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि सीपी सिंह कितने गंभीर हैं। अभी उनके पास मौका था कि वह सरकार से अपने सवाल का जवाब लेते। भाजपा के मुख्य सचेतक बिरंचि नारायण का भी इस दौरान प्रश्न आता है। स्पीकर द्वारा बार बार बिरंची नारायण का नाम पुकारा जाता है लेकिन वेल में रहने के कारण बिरंची नारायण पूरक प्रश्न नही पूछते है। नाराज स्पीकर ने कहा कि सदस्यों का यह आचरण गलत है। सवाल भी करते हैं और जवाब भी नहीं सुनते। इससे सदन के प्रति और जनता के प्रति गलत संदेश जा रहा है।

इस हो-हंगामें के बीच सदन में पाकिस्तान और बांग्लादेश की भी इंट्री हो गयी। भाजपा के नीलकंठ सिंह मुंडा के एक सवाल पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वह पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए मुख्यमंत्री नहीं बने हैं। मेरा काम सवा तीन करोड़ झारखंडियों की समस्याओं का समाधान करना है। दरअसल, नीलकंठ सिंह मुंडा ने सूचना के माध्यम से सवाल उठाया था कि प्रदेश में आदिवासी, दलित, चिकबराइक और लोहरा सहित कई का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है। लेकिन बांग्लादेशियों का जाति प्रणाम पत्र बन जा रहा है। मुख्यमंत्री ने नीलकंठ सिंह मुंडा के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि आप वरिष्ठ और संवेदनशील हैं लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा में हैं।

स्पीकर ने कहा कि जेपीएससी पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन के अंदर सरकार का पक्ष रख दिया है। इसके बावजूद आपका हंगामा ठीक नहीं है। सदस्य आप अपनी सीट पर बैठें। शीतकालीन सत्र के चौथे दिन की पहली पाली में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के विधायकों द्वारा हंगामा पर यह बातें विधानसभा स्पीकर रविन्द्र नाथ महतो ने कही। उन्होंने कहा कि आप चाहते थे कि सीएम सदन के अंदर जेपीएससी पर अपना पक्ष रखें, उन्होंने अपना पक्ष रखा भी। यह जरूरी नहीं है कि आपकी मर्जी के अनुसार सत्ता पक्ष अपना जवाब दे।

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