रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ के तीन स्वदेशी उत्पाद सशस्त्र बलों को सौंपे

–  आज सौंपी गईं प्रणालियां तीनों सेनाओं की युद्धक क्षमता और बढ़ाएंगी
–  राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ का ‘डेयर टू ड्रीम 3.0’ प्रोजेक्ट लॉन्च किया
–  35 वर्ष से कम आयु के 16 डीआरडीओ वैज्ञानिक सम्मानित किये गए

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को इनोवेटर्स और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए ‘डेयर टू ड्रीम 3.0’ प्रोजेक्ट लॉन्च किया। उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ‘डेयर टू ड्रीम 2.0’ प्रतियोगिता के 40 विजेताओं को सम्मानित किया। रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ के तीन स्वदेशी उत्पाद और प्रणाली सशस्त्र बलों को सौंपी। सेना, वायुसेना और नौसेना को आज सौंपी गईं प्रणालियां तीनों सेनाओं की युद्धक क्षमता को बढ़ाएंगी।

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ की ‘डेयर टू ड्रीम 2.0’ प्रतियोगिता के 40 विजेताओं को सम्मानित करने के बाद डीआरडीओ के तीन स्वदेशी उत्पाद सशस्त्र बलों को सौंपे। राजनाथ सिंह ने भारतीय वायु सेना के लिए विकसित वीडियो प्रोसेसिंग और स्विचिंग मॉड्यूल वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल संदीप सिंह को सौंपा। यह उच्च बैंडविड्थ चैनल बॉन्डिंग, आसान नेटवर्किंग के साथ एक अत्याधुनिक मॉड्यूल है और 5वीं पीढ़ी के विमान विकास कार्यक्रमों को पूरा करेगा।

दूसरा उत्पाद सोनार परफॉर्मेंस मॉडलिंग सिस्टम भारतीय नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों और पानी के नीचे निगरानी स्टेशनों आदि के लिए उपयोगी है। यह सिस्टम वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ वाइस एडमिरल सतीश नामदेव घोरमडे को सौंपा गया। तीसरी बंड ब्लास्टिंग डिवाइस एमके-II भारतीय सेना के वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती को सौंपी गई। इसका उपयोग युद्ध के दौरान मशीनीकृत पैदल सेना की गतिशीलता को बढ़ाने के लिए खाई-सह-बांध बाधाओं की ऊंचाई को कम करने के लिए किया जाता है।

उन्होंने ‘डेयर टू ड्रीम 2.0’ पुरस्कार विजेताओं और डीआरडीओ के युवा वैज्ञानिकों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ‘डेयर टू ड्रीम’ डीआरडीओ की अखिल भारतीय प्रतियोगिता है, जो भारतीय शिक्षाविदों को स्टार्टअप्स की उभरती रक्षा और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों, प्रणालियों को विकसित करने के लिए बढ़ावा देती है। समारोह में वर्ष 2019 के लिए डीआरडीओ युवा वैज्ञानिक पुरस्कार भी प्रदान किए गए। 35 वर्ष से कम आयु के सोलह डीआरडीओ वैज्ञानिकों को उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्रों में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह मंच डीआरडीओ प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ) योजना के तहत युवा वैज्ञानिकों को उनके विचारों को साकार करने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

‘डेयर टू ड्रीम’ और ‘डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट्स’ पुरस्कारों के विजेताओं को बधाई देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ये पुरस्कार कुछ नया बनाने के लिए देश के युवाओं की ऊर्जा, उत्साह और प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। रक्षा मंत्री ने मजबूत और आत्मनिर्भर ‘न्यू इंडिया’ बनाने के सरकार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इस केवल एक-दूसरे के प्रयास से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत अनुभव और संस्कृति में सबसे पुराने देशों में से एक है और देश की कुल आबादी में लगभग 60 प्रतिशत युवा हैं। उन्होंने युवाओं को नए नवाचारों को देखने, सीखने, बनाने के साथ ही देश को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस मौके पर गुजरात विश्वविद्यालय में उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्र ‘सरदार वल्लभभाई पटेल सेंटर फॉर साइबर-सिक्योरिटी रिसर्च’ की स्थापना के लिए गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एचए पंड्या और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ, जी सतीश रेड्डी के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का भी आदान-प्रदान किया गया। राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के दो नीति दस्तावेज ‘निर्देशित अनुसंधान नीति’ और ‘अभिलेख प्रबंधन नीति-2021’ भी जारी किये। अपने संबोधन में डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. रेड्डी ने उन्नत प्रौद्योगिकियों के तेजी से विकास और उद्योग और शिक्षाविदों के साथ काम करने में आसानी के लिए तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर रक्षा और उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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