झारखंड के चार हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर से आनलाइन जुड़ेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

रांची । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ करेंगी। इस अभियान का उद्देश्य टीबी से ग्रसित उपचाररत रोगियों के लिए सामुदायिक सहायता एवं सहभागिता सुनिश्चित करवानी है। मालूम हो कि सरकार द्वारा टीबी उन्मूलन के लिए मरीजों को हर माह 500 रुपये पोषण सहायता राशि उपलब्ध करायी जा रही है। सरकार की मंशा है कि इसके अतिरिक्त पोषण सहायता के लिए जनप्रतिनिधि, कारपोरेट, गैर-सरकारी संस्थान या सामान्य नागरिक आगे आयें। मरीजों को मदद पहुंचायें। कम से कम एक साल तक मरीजों को अपने स्तर से सहायता राशि दान करें। सरकार ने लक्ष्य तय किया है कि भारत को किसी सूरत में टीबी मुक्त देश बनाना है।

झारखंड के इन चार केंद्रों से राष्ट्रपति करेंगी संवाद
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से झारखंड के चार चयनित आयुष्मान भारत हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों से जुड़ेंगी। इनमें पूर्वी सिंहभूम जिले का अमाई नगर केंद्र, बोकारो का तेतरी केंद्र, पलामू का कुंदरी केंद्र और गुमला जिले का गम्हरिया केंद्र शामिल हैं। इस कार्यक्रम में सभी राज्यों से लोग वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे।

झारखंड में 1600 केंद्रों पर टीबी का इलाज मुफ्त
मालूम हो कि झारखंड में टीबी के इलाज के लिए सरकार की ओर से 1600 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाये गये हैं। पहले इनकी संख्या मात्र 300 थी। इन केंद्रों पर टीबी मरीजों की हर तरह की जांच की सुविधा है। यहां मरीजों की काउंसिलिंग भी की जाती है। झारखंड में इस समय करीब 53 हजार टीबी के सक्रिय मामले हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2021 का है। अगर राजधानी रांची की बात करें तो यहां वर्ष 2021 में 6,420 टीबी मरीज पाये गये थे। झारखंड के स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन मरीजों के लिए समय समय पर विशेष अभियान भी चलाया जाता है।

वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य
कुछ माह पहले केंद्र सरकार के अधिकारियों की एक टीम झारखंड आयी थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिल कर वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य की जानकारी दी थी। बताया था कि केंद्र सरकार ने 2025 तक हर हाल में देश को टीबी की बीमारी से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस अभियान में बढ़-चढ़ कर भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही थी। कहा था कि झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में टीबी मरीजों की पहचान के लिए अभियान चलाया जायेगा।

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