सहकारिता को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए स्वयं को तैयार करें राज्य : शाह

नई दिल्ली। केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता क्षेत्र को नई तकनीकी का इस्तेमाल कर इसे पारदर्शी व जवाबदेह बनाने पर जोर देते हुए कहा कि राज्यों को इस बदलाव के लिए स्वयं को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य इकाइयां इस बदलाव के लिए तैयार नहीं होती, ये संभव नही हो पाएगा। इसलिए सहकारिता क्षेत्र में प्रोफेशनलिज्म को स्वीकार कर इसकी कुशलता बढ़ानी होगी।

शाह ने यहां विज्ञान भवन में राज्यों के सहकारिता मंत्रियों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन में सहकारिता राज्यमंत्री बी एल वर्मा और 21 राज्यों के सहकारिता मंत्रियों और दो केन्द्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपालों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

इस अवसर पर शाह ने कहा कि अब सहकारिता आंदोलन के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री मोदी ने यह विश्वास समग्र सहकारिता क्षेत्र को दिया है। उन्होंने कहा कि सहकारिता राज्यों का क्षेत्र है और जब तक राज्य की इकाइयां इस बदलाव के लिए अपने आपको तैयार नहीं करती, ये कभी नहीं हो सकता। इन सभी बदलावों को राज्य भी स्वीकार करें और इस रोड मैप में अपना योगदान दें तभी सहकारिता को ताकत मिल सकती है।

अपने संबोधन में केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि ये दो दिवसीय सम्मेलन आने वाले दिनों में इस देश में सहकारिता को एक नए पड़ाव तक ले जाने वाला सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि भारत में सहकारिता लगभग 125 साल पुराना विचार और संस्कार है लेकिन किसी भी गतिविधि में अगर हम समयानुकूल बदलाव नहीं करते तो वो कालबाह्य हो जाती है और अब समय आ गया है कि सहकारिता क्षेत्र आज की जरूरतों के अनुकूल अपने आप को मजबूत करके एक बार फिर सबका विश्वास अर्जित करें। उन्होंने कहा कि सहकारिता प्रमुख रूप से राज्यों का विषय है और हमारे संविधान ने सहकारिता की सभी गतिविधियों को राज्यों पर छोड़ा है, लेकिन भारत जैसे विशाल देश में पूरा सहकारिता आंदोलन एक ही रास्ते पर चले, इसके लिए सभी राज्यों को इस बारे में अपने साझा विचार तय करने होंगे।

शाह ने कहा कि सहकारिता को मजबूत करने के लिए प्राथमिक कृषि ऋण समिति (पैक्स) को मजबूत करना सबसे ज्यादा जरूरी है और इसके लिए सरकार कई काम कर रही है। उन्होंने राज्यों के सहकारिता मंत्रियों से कहा कि हम सबको मिलकर सहकारिता क्षेत्र में टीम इंडिया का भाव जागृत करना होगा और बिना किसी राजनीति के एक ट्रस्टी की भूमिका में अपने-अपने राज्य में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने और इसके विकास के लिए आगे बढ़ना होगा। सहकारिता के विगत सवा सौ साल के इतिहास को देखें तो पता चलता है कि भारत के अर्थतंत्र में सहकारिता का बहुत गौरवपूर्ण योगदान रहा है और हमारा प्रयास है कि अगले सौ साल में सहकारिता अनिवार्य रूप में भारतीय अर्थतंत्र का हिस्सा बने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 05 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के स्वप्न में सहकारिता का बहुत बड़ा योगदान हो।

देश के पहले सहकारिता मंत्री ने कहा कि वर्तमान में देश में कई क्षेत्रों में लगभग साढ़े 08 लाख सहकारी इकाइयां हैं। इनमें से कृषि वित्त वितरण और कृषि से जुड़े सभी क्षेत्रों में सहकारिता का बहुत बड़ा योगदान रहा है। देश में डेयरी और हाउसिंग की डेढ़ लाख समितियां हैं, 97 हजार पैक्स हैं और मधु सहकारी समितियां 46 हजार हैं, उपभोक्ता समितियां 26 हजार हैं, कई मत्स्यपालन सहकारी समितियां हैं और कई सहकारी चीनी मिलें हैं। देश के 51 प्रतिशत गांव और 94 प्रतिशत किसान किसी ना किसी रूप में कोऑपरेटिव से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में सहकारिता का योगदान बहुत बड़ा है।

अमित शाह ने पैक्स को बहुउद्देश्यीय बनाने पर जोर देते हुए कहा कि यह आज की जरूरत है। कई नए आयाम जो इन मॉडल बाइलॉज के माध्यम से हम जोड़ना चाहते हैं, उसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और गतिशीलता का भी प्रावधान है।अभी लगभग 65000 पैक्स क्रियान्वयन में हैं और हमने तय किया है कि तीन लाख नए पैक्स हम 5 साल में बनाएंगे। इस तरह लगभग 2,25,000 पैक्स के रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य रखा गया है।

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