झारखंड विधानसभा : शोर-शराबे के बीच पढ़ा गया शोक संदेश

  •  सदन के बाहर विधायकों ने किया प्रदर्शन
  •  शोक संदेश के बाद कार्यवाही सोमवार दिन के 11 बजे तक के लिए स्थगित
  •  छह सितंबर को पेश होगा पहला अनुपूरक बजट

झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया। पहले दिन सदन में शोक संदेश पढ़ने के दौरान विपक्षी विधायकों ने जमकर हो-हल्ला किया।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद जब विधानसभाध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो शोक संदेश पढ़ रहे थे। इसी दौरान भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही सीट से उठकर बोलने लगे। उन्होंने कहा कि पहले नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर चर्चा की जाये। इसके बाद शोक संदेश पढ़ा जाये। इसके बाद उनके समर्थन में विरंची नारायण सहित कई अन्य भाजपा विधायक भी आ गये। विधायकों ने बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने की मांग को लेकर नारे लगाये। भानु प्रताप शाही के इस बर्ताव पर विधानसभाध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने शोक प्रकाश का सम्मान करें। जिद करना उचित नहीं हैं। हमलोग भी कल गुजर जायेंगे। इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है।

मुख्यमंत्री के शोक संदेश के दौरान भी जारी रहा हंगामा
विधानसभाध्यक्ष के शोक संदेश पढ़ने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शोक संदेश पढ़ा। इस दौरान भी विपक्षी विधायकों का शोर-शराबा जारी रहा। वहीं, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी को शोक संदेश पढ़ने का समय न देकर विपक्ष के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण को बोलने का समय दिया गया, तब भी विपक्षी विधायकों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि सदन में शोक प्रकाश विधायक दल के नेता की ओर से रखा जाता है। बाबूलाल मरांडी हमारे नेता हैं। इसलिए उन्हें समय दिया जाये, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब विधानसभाध्यक्ष ने बिरंची नारायण को शोक प्रकाश पढ़ने के लिए कहा तो उन्होंने थोड़ी देर इसे पढ़ा फिर साथी विधायकों के रुख को देखते हुए बैठ गये। उन्होंने कहा कि इसे पढ़ा हुआ मान लिया जाये। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने विधायक पद्रीप यादव का नाम पुकारा। जिस पर भाजपा विधायकों ने फिर विरोध शुरू कर दिया। विधायक सीपी सिंह ने कहा कि आखिर किस हैसियत से प्रदीप यादव को बोलने का मौका दिया गया।

कोरोना से मरनेवालों को दी गयी श्रद्धांजलि
मानसून सत्र के पहले दिन शुक्रवार को इस साल कोरोना सहित अन्य वजहों से मरने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान विस अध्यक्ष रविन्द्र नाथ महतो के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई विधायकों ने एक-एक कर शोक संदेश पढ़कर मृतकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद दो मिनट का मौन रखा गया। इस दौरान भाकपा माले विधायक विनोद कुमार सिंह ने कहा कि अप्रैल, मई और जून में कोरोना ने राज्य के कई स्वास्थ्यकर्मियों, डॉक्टर, पत्रकार और पुलिसकर्मियों को हमसे छीन लिया। इसके बावजूद न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने ऐसे मृतकों के आश्रित को कोई मुआवजा दिया। ऐसे मृतकों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब उनके आश्रितों को मुआवजा मिलेगा।
विधायक सरयू राय ने कहा कि शोक प्रकाश में पत्रकारों के नाम को भी जोड़ा जाना चाहिए। कोरोना काल में जिन फ्रंटलाइन वर्कर, एएनएम तथा स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीजों की 24 घंटे सेवा की है उनके योगदान की सराहना की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कार्यरत कर्मियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके बाद दो मिनट का मौन रखा गया। इसके बाद विधानसभाध्यक्ष ने 12 बजकर चार मिनट पर सदन की कार्यवाही सोमवार दिन के 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

बहाली की मांग को लेकर विनोद सिंह ने दिया धरना
झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन माले विधायक विनोद सिंह रिक्त पदों पर बहाली की मांग को लेकर विधानसभा के द्वार पर धरने पर बैठ गये। उन्होंने एक पोस्टर लिया हुआ था जिसमें सभी रिक्त पदों पर बहाली की मांग की गयी थी। वे हाई स्कूल शिक्षक, पंचायत सचिव, समेत तमाम चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की मांग कर रहे थे। उन्होंने राज्य सरकार से अनुबंध कर्मियों से किये गये वादे को पूरा करने की मांग की।

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