त्रिकूट रोपवे हादसे की जिम्मेदार है दामोदर रोपवे इन्फ्रा लिमिटेड

मौत का रोपवे : न सुरक्षा मानकों का ध्यान रखती है और न किसी की सुनती है यह कंपनी

झारखंड पर्यटन के लिए गौरव की पहचान बने देवघर के त्रिकूट रोपवे में हुए हादसे ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। दो सैलानियों की मौत के अलावा इन पंक्तियों के लिखे जाने तक दो दर्जन से अधिक जिंदगियां पिछले 36 घंटे से हवा में झूल रही हैं। सेना, वायुसेना और एनडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं, लेकिन इस रोपवे का संचालन करनेवाली कंपनी के सभी अधिकारी और कर्मचारी घटनास्थल से गायब हो गये हैं। इससे साफ पता चलता है कि यह केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी और रखरखाव में लापरवाही का परिणाम है। इस रोपवे का संचालन करनेवाली दामोदर रोपवे इन्फ्रा लिमिटेड का काम केवल त्रिकूट में ही नहीं, दूसरी जगहों पर भी विवादित रहा है। मध्यप्रदेश के मैहर में भी रोपवे का संचालन यही कंपनी करती है और वहां कई बार भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लग चुके हैं। त्रिकूट रोपवे के संचालन में भी कई बार तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ियों की बात सामने आयी, लेकिन कभी किसी ने इस कंपनी के खिलाफ कदम उठाने की हिम्मत नहीं दिखायी। अब इस हादसे के बाद मामले की जांच होगी और दिन बीतने के साथ लोग इस हादसे को भी भूल जायेंगे। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इस तरह के हादसों के लिए जिम्मेवार लोगों को सजा कैसे मिलेगी। त्रिकूट रोपवे हादसे के बाद इसकी संचालक कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं। इन सवालों के जवाब तलाशती आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह की खास रिपोर्ट।

झारखंड में सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रहे त्रिकूट रोपवे एक हादसे के बाद गंभीर विवादों में फंस गया है। रविवार को हुए इस हादसे में अब तक दो लोगों की जान जा चुकी है और दो दर्जन से अधिक लोग फंसे हुए हैं। हादसे के 36 घंटे बाद भी इन लोगों को सुरक्षित निकाला नहीं जा सका है। उन दो दर्जन से अधिक लोगों की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है, जो जमीन से करीब आठ सौ मीटर उपर हवा में लटके हुए हैं और समय बीतने के साथ ही उनकी सांस भी जवाब दे रही है।

वैसे तो कहा जाता है कि हादसों की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन त्रिकूट रोपवे के बारे में यह बात सही नहीं है। वहां यह हादसा नहीं हुआ है, बल्कि रोपवे का संचालन करनेवाली कंपनी दामोदर रोपवे एंड इन्फ्रा लिमिटेड के भ्रष्ट आचरण, मनमाने रवैये और लापरवाही की वजह से झारखंड के माथे पर बदनामी का यह कलंक लगा है। कोलकाता स्थित इस कंपनी की कार्यशैली इतनी विवादास्पद है कि कई बार इसके खिलाफ शिकायत की गयी है, लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह कंपनी देश के कई पर्यटक स्थलों पर रोपवे का संचालन करती है, लेकिन कहीं भी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता है। यहां तक कि यात्री रोपवे की सुरक्षा आॅडिट हर तीन महीने में कराने का प्रावधान है, लेकिन दामोदर कंपनी को इसकी भी परवाह नहीं है।

कई मायनों में खास है त्रिकूट रोपवे
त्रिकूट पहाड़ देवघर में सबसे रोमांचक पर्यटन स्थलों में से एक है। इस पहाड़ी की ऊंचाई समुद्र तल से 2470 फीट ऊपर है। यह देवघर शहर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर देवघर-दुमका रोड पर मोहनपुर ब्लॉक में है। यह भारत का सबसे ऊंचा रोपवे है। त्रिकूट रोपवे जमीन से लगभग 15 सौ फीट की ऊंचाई पर है। त्रिकूट पहाड़ की तलहटी मयूराक्षी नदी से घिरी हुई है। इस रोपवे में पर्यटकों के लिए कुल 25 केबिन उपलब्ध हैं, जिसमें प्रत्येक केबिन में चार लोग बैठ सकते हैं। रोपवे की क्षमता पांच सौ लोग प्रति घंटे है। रोपवे की लंबाई लगभग 766 मीटर (2512 फीट) है। चोटी तक पहुंचने के लिए केवल आठ से 10 मिनट लगते हैं और इसका टिकट 130 रुपये है। रोपवे का समय नियमित रूप से सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक है। तेज हवा या खराब मौसम में रोपवे को बंद कर दिया जाता है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी
त्रिकूट रोपवे के संचालन और रख-रखाव में सुरक्षा मानकों की हमेशा से अनदेखी होती है। दामोदर रोपवे कंपनी ने यहां एक प्रबंधक और आठ कर्मियों को तैनात कर रखा है। ये सभी रविवार की दोपहर तीन बजे के करीब हुए हादसे के बाद से गायब हैं। त्रिकूट रोपवे के पास के दुकानदार और अन्य लोग बताते हैं कि रविवार को तेज हवा चल रही थी और रामनवमी का दिन होने के कारण सैलानियों की भारी भीड़ थी। कंपनी के लोगों को कई बार चेताया गया कि तेज हवा चल रही है और पूरी क्षमता से रोपवे चलाने से गड़बड़ी की आशंका है। लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया और एक साथ सभी केबिन को ऊपर भेजा जाने लगा, जबकि आम तौर पर ऊपर जाने और नीचे आनेवाले केबिनों की संख्या लगभग बराबर रखी जाती है। इस सुरक्षा मानक की अनदेखी का परिणाम यह हुआ कि एक साथ सभी केबिन ऊपर जाने लगी और केबलों पर दबाव अचानक बढ़ गया। कर्मियों ने स्थिति को काबू में करने का प्रयास किया, लेकिन जल्दी ही उन्हें समझ में आ गया कि मामला गंभीर है। इसके बाद वे बिना किसी को कुछ बताये मौके से गायब हो गये।

हमेशा विवादों में रही है दामोदर कंपनी

त्रिकूट रोपवे का संचालन दामोदर रोपवे इन्फ्रा लिमिटेड कंपनी करती है। कोलकाता की यह कंपनी देश के कई अन्य स्थानों पर भी रोपवे का संचालन करती है। यह कंपनी 1974 में स्थापित हुई थी। सबसे आश्चर्य की बात है कि इस कंपनी के खिलाफ की गयी तमाम शिकायतों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इस कंपनी की पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थस्थल मैहर देवी में इस कंपनी को अनुचित ढंग से लाभ पहुंचाया गया।
क्या हुआ था मैहर देवी में

कोरोना काल में 56 दिन तक यात्रियों का आवागमन बंद रहने के एवज में रोपवे प्रबंधन को हुई आर्थिक क्षति की भरपाई शारदा प्रबंधन समिति ने की, लेकिन इसमें उसे भारी नुकसान हुआ। रोपवे प्रबंधन को 56 दिनों के नुकसान के एवज में नौ माह का एक्सटेंशन दे दिया गया। वह भी उस स्थिति में, जब रोपवे प्रबंधन का एग्रीमेंट समाप्त होना था और इसके बाद समिति को होने वाले लाभ का 30 फीसदी हिस्सा बढ़कर 70 फीसदी होने वाला था। लेकिन इस समय वृद्धि से अब वापस रोपवे प्रबंधन को 70 फीसदी और समिति को 30 फीसदी ही लाभ मिलेगा।
प्रशासनिक लापरवाही भी उजागर

त्रिकूट रोपवे हादसे ने गंभीर प्रशासनिक लापरवाही भी उजागर की है। हादसे के कई घंटे बाद न तो स्थानीय प्रशासन को घटना की सूचना दी गयी और न पुलिस को। राहत और बचाव का अभियान भी काफी देर से शुरू किया गया, लेकिन तब तक अंधेरा घिरने लगा था और एनडीआरएफ की टीम को अभियान रोकना पड़ा। सेना और वायुसेना ने दिन के उजाले में ही बचाव अभियान शुरू किया, जबकि प्रशासन यदि चाहता तो वहां रोशनी आदि का प्रबंध किया जा सकता था। रोपवे संचालन करनेवाली कंपनी की लापरवाही का आलम तो यह था कि हादसे की बाबत उसका कोई भी अधिकारी किसी तरह की जानकारी से इनकार करता रहा। हादसे के 24 घंटे बाद भी कंपनी की तरफ से कोई बयान नहीं दिया गया है। गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे की तारीफ की जानी चाहिए जिन्होंने इस मामले में मानवता का परिचय देते हुए घटना के समय से ही वहां कैंप किये हुए हैं और केंद्र सरकार के संज्ञान में इस मामले को लाते हुए मदद और बचाव कार्य सुनिश्चित करवाया है।

ऐसे में यह सवाल तो उठता ही है कि आखिर झारखंड का गौरव माने जानेवाले इस रोपवे के संचालन का जिम्मा दामोदर कंपनी जैसी विवादित संस्था को क्यों दिया गया। क्या उसे ठेका देते समय उसके ट्रैक रिकॉर्ड की जांच की गयी। ये ऐसे सवाल हैं, जो आनेवाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। इसलिए अब इस विवादित और खतरनाक कंपनी को ऐसा कोई भी काम नहीं दिया जाना चाहिए। साथ ही उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जिम्मेवार लोगों को सीखचों के पीछे भेजना चाहिए।

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