झारखंड में खतियान के आधार पर नहीं बन सकती नियोजन नीति : हेमंत सोरेन

ऐसा हुआ तो कोर्ट खारिज कर देगा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में खतियान के आधार पर नियोजन नीति नहीं बनायी जा सकती है,ऐसा करने पर कोर्ट तुरंत खारिज कर देगा। उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि स्थानीय नीति कैसे बनानी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही स्थानीय नीति की घोषणा कर दी जाएगी। हेमंत सोरेन बुधवार को विधानसभा में अनुदान मांग पर चर्चा के बाद सरकार की ओर से जवाब दे रहे थे।

सोरेन ने कहा कि वर्ष 1985 को आधार वर्ष मान कर स्थानीय नीति बनाने वाले भाजपा नेता आज 1932 की खतियान की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के इशारे पर नियुक्ति और स्थानीय नीति को लेकर हाय-तौबा मचा रहे हैं, छाती पिटवाने का काम कर रहे हैं, दो साल में भाजपा नेता 1985 की जगह 1932 की बात करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार ने नौकरी का ऐसा दरवाजा खोल दिया, जो कोर्ट में औंधे मुंह गिर गया।

पांच लाख रोजगार देने को कहा था,नौकरी नहीं

मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग को 7267 रिक्त पदों को भरने के लिए अधियाचना भेजी जा चुकी है, जिसमें से जेएसएससी द्वारा 2898 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन भी निकाली जा चुकी है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य में 30 हजार पदों पर नियुक्ति के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से पांच लाख लोगों को नौकरी नहीं रोजगार देने की बात कही गयी थी।

प्रशासनिक सुधार जरूरी, देवाशीष गुप्ता कमेटी की रिपोर्ट मिली

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक सुधार को लेकर देवाशीष गुप्ता कमेटी की रिपोर्ट आज ही उन्हें मिली है। किस तरह से काम को गति दी जा सके, इस पर ध्यान देने की जरुरत है,ताकि सिर्फ पांच साल नहीं, पीढ़ी दर पीढ़ी को फायदा मिल सके।

अब किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण सिर्फ 2013 के एक्ट से ही

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य में अब किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण सिर्फ वर्ष 2013 में बने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ही होगा, एसबीए एक्ट या कोल बियरिंग एक्ट के तहत अब राज्य में भूमि अधिग्रहण नहीं होगा।

विपरीत परिस्थितियों में राज्य सरकार का बेहतर प्रदर्शन

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में राज्य सरकार ने बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से कहा जाता है कि सरकार निक्कमी है, निठल्ला है। उन्होंने कहा कि पिछले 22 साल में पिछली सरकारों ने क्या काम किया। उन्होंने राज्य को दिशा देने का काम किया। उन्होंने कहा कि राज्य में साढ़े तीन साल झामुमो की सरकार रही है। इस दौरान पिछले दो साल कोविड का प्रकोप रहा है। बावजूद इसके सरकार ने बेहतर करने का प्रयास किया है। कोरोना काल में राज्य में कैसे काम हुआ, ये सभी जानते हैं।

किस बॉल पर चौका-छक्का मारना है, पता है

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले वे सदन के उस तरफ बैठते थे और बॉलिंग करते थे और ये लोग बैटिंग करते थे। लेकिन अब वे बैटिंग कर रहे हैं। उन्हें पता है कि किस बॉल पर चौका मारना है, किस बॉल पर छक्का मारना है। किस बॉर पर दौड़ कर रन लेना है। उसी आधार पर चल रहे हैं।

नया सचिवालय, मंत्रियों-विधायकों को नया आवास

हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार इसी कार्यकाल में मंत्रियों-विधायकों को नया आवास मुहैय्या कराएगी, वहीं नया सचिवालय भी बनाने का काम शुरू कर दिया गया हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल पेंशन स्कीम चालू किया है। जो व्यवस्था देश के किसी राज्य में नहीं

हमारी नीति चली तो केंद्र से भीख मांगने की जरुरत नहीं पड़ेगी

हेमंत सोरेन कहा कि झारखंड के साथ केंद्र सरकार द्वारा हमेशा सौतेला व्यवहार किया जाता रहा है। चाहे वो डीवीसी का मामला हो या फिर कोई ओर केंद्र से उतना सहयोग नहीं मिला। इसके बावजूद सरकार बेहतर तरीके से काम कर रही हैं। पीडब्लूडी विभाग से रिकॉर्ड रेवेन्यू सरकार को मिले हैं। फोरेस्ट विभाग से पिछली सरकार में कोई रेवेन्यू नहीं मिला। लेकिन वर्तमान सरकार ने करोड़ों रेवेन्यू प्राप्त किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सरकार काम कर रही हैं। उससे आने वाले दिनों में झारखंड को केंद्र सरकार के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा। बल्कि झारखंड ही केंद्र सरकार को सहयोग देगा।

मुख्यमंत्री ने की कई अन्य घोषणाएं

मुख्यमंत्री ने पेयजल, बिजली, जल संसाधन और अन्य योजनाओं को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने 100 यूनिट तक बिजली बिल को माफ करने और 250 वर्गफीट से 350 वर्गफीट पर बने मकानों से होल्डिंग टैक्स नहीं लिया जाएगा। इससे 85 हजार लोगों को फायदा मिलेगा। 12 जिलों में इग्लिंश मीडियम की तर्ज पर सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के उत्तर से नाराज भाजपा के विधायकों ने सदन का बर्हिगमन किया। इसके साथ ही झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन बुधवार को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग की 59 करोड़ 38 लाख 47 हजार रुपये से अधिक की अनुदान मांग को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। वहीं अन्य सभी विभागों की अनुदान मांगों को भी गिलोटीन के माध्यम से पारित कर दिया, तत्संबंधी विनियोग विधेयक को भी मंजूरी प्रदान कर दी गयी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष रविन्द्र नाथ महतो ने विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

Comments are closed.