स्वर कोकिला की संगीमय श्रद्धांजलि को वर्षों तक याद रखेंगे तोरपा के लेाग

स्वर साम्राज्ञी भारत रत्न लता मंगेशकर को वैसे तो पूरी दुनिया अपने ढंग से श्रद्धांजलि दे रही है, पर विद्याथी कला संगम तोरपा ने शनिवार को नगर भवन तोरपा में उन्हें जो संगीतमय श्रद्धांजलि दी, उसे तोरपा के लोग भी वर्षों तक याद रखेंगे। संत जोसेफ कॉलेज तोरपा के उप प्राचार्य फादर रवि एक्का, स्थानीय कलाकार सुनैनी दास, पिया षोघ, अभिषेक राय के अलावा रांची की जानीमानी गायिका माधुरी मेहर, कविता होरो, मो निसार और विजय सरकार ने सहित अन्य कलाकारों ने संगीत का ऐसा समां बांधा कि खचाखच भरे नगर भवन में श्रोता जड़वत संगीत के सागर में डूबे रहे। कार्यक्रम के पूर्व अतिथि रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ नागेश्वर मांझी, उप प्रमुख सोफिया सुल्ताना, संत जोसेफ कॉलेज के प्राचार्य फादर एमानुएल बागे और प्राचार्य गब्रिएल सुरीन सहित अन्य अतिथियों ने स्वर कोकिला लता मंगेशकर के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर और दीप प्रवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। किये। कार्यक्रम का संचालन करते हुए अजीत जायसवाल ने लता मंगेशकर को नमन किया और कहा कि लता मंगेशकर दुनिया की एकमात्र ऐसी गायिका हैं, जिन्होंने 36 भाषाओं में तीस हजार से अधिक गाने गाये हैं। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए फादर रवि ने कहा कि मृतक जीवितों में जीते हैं और स्वर ही उनकी पहचान है।

लता मुंगेशकर आज भी लोगों के दिल में जिंदा हैं। संगीतमय श्रद्धांजलि की शुरुआत करते हुए उप प्राचार्य फादर रवि ने लता मंगेशकर के गाये गीत एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाद में सुनैनी दास ने श्रीराम चंद्र कृपाल भजु भव और दिल हुम—हुम करे गाकर मानों श्रोताओं पर संगीत की अमृतधारा छोड़ दी। प्रदान संस्था की पिया घोष और अभिषेक राय ने भी अपने गीतों से खूब तालियां बटोरी।

बाद में रांची से आई गायिका माधुरी मेहर के गाये गीत नाम गुम जायेगा, चेहरा ये पर लोग संगीत की गंगा में डुबकियां लगाते रहे। फादर रवि ने माधुरी के साथ इस गीत में साथ देकर इसे और मनमोहक बना दिया। रांची के कलाकार कविता होरो, मो निसार और विजय सरकार ने भी अपने सुमधुर गीतों से श्रोताओं को बांधे रखा। कार्यक्रम को सफल बनाने में अजीत जायसवाल और धमेंद्र प्रसाद ने योगदान दिया।

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